पहाड़ों की रानी मसूरी के बारे में आपने सुना भी होगा और देखा भी होगा कि यह कितनी खूबसूरत है। सैलानी हों या फिर साहित्यकार, सभी को सदियों से आकर्षित करती रही है। मगर इसकी खूबसूरती के बीच में एक ऐसी रहस्यमयी जगह भी है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं।
जब भी हम भारत के भुतहा घरों के बारे में सोचते हैं तो लंबी देहर माइन्स लिस्ट में आ जाती हैं। यह एक ऐसी जगह है जहां लगभग 50000 मजदूरों की दर्दनाक तरीके से मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने रात में उन मृत मजदूरों की रोने और चीखने की आवाजें सुनी हैं।
लंबी देहर माइन्स उत्तराखंड के मसूरी के बाहरी इलाके में, लाइब्रेरी चौक, माल रोड से लगभग 10 किमी दूर स्थित है। वहां पहुंचने के लिए आपको थोड़ी यात्रा करनी पड़ सकती है, लेकिन प्रतीक्षा इसके लायक है। हाथीपाँव, जॉर्ज एवरेस्ट जैसे दर्शनीय पिकनिक स्थलों से बहुत दूर जीर्ण-शीर्ण और काई से ढके हुए, धुंध से लिपटे जंगलों और विशाल पहाड़ों के बीच स्थित है लंबी देहर माइन्स।
स्थान की प्राकृतिक उत्कृष्टता किसी भी प्रकृति प्रेमी को प्रभावित कर सकती है। लेकिन इस साइट में दिल दहलानेवाला रहस्य हैं और इसे उत्तराखंड के सबसे प्रेतवाधित स्थानों में से एक माना जाता है।
लंबी देहर माइन्स की एक भयानक कहानी:
लंबी देहर माइंस को 50,000 से अधिक खान श्रमिकों की आत्माओं द्वारा प्रेतवाधित होने के लिए जाना जाता है, जिनकी 1990 में खानों में रहस्यमय तरीके से मृत्यु हो गई थी। विशिष्ट चुप्पी के बीच, लंबी देहर माइंस में एक बेहद डरावना वाइब है जो आपकी रीढ़ को ठंडक पहुंचा सकता है।
यदि आप मूल निवासियों के साथ बातचीत करते हैं, तो वे आपको उस स्थान से दूर रहने की सलाह भी दे सकते हैं क्योंकि वे यहाँ एक नकारात्मक भावना की उपस्थिति में विश्वास करते हैं।
इस जगह की कहानी सन् 1990 से जुड़ी है। लंबी देहर माइंस एक चूना पत्थर की खदान हुआ करती थी। 50000 से ज्यादा मजदूर खदान में काम करते थे।
लोगों का कहना है कि यहां काम करने वाले मजदूरों को भयंकर बीमारियां हो जाती थीं। कहते हैं कि खदान में काम करने वाले 50,000 मजदूर गलत प्रक्रिया से होने वाली माइनिंग के चलते दर्द से मर गए थे। जो मजदूर खदान के पास रहते थे उन्हें फेफड़ों की बीमारी हो गई थी। से सभी मजदूर खांस-खांस कर मर गए। सभी मजदूरों को खून की उल्टियां हुई थीं।
एक बार खदान में लैंडस्लाइड हुई, जिसमें भारी संख्या में मजदूर जिंदा दफन हो गए। इसके बाद लोगों का मानना है कि प्रेत आत्माएं रहने लगीं।इसके बाद धीरे-धीरे खदान में खुदाई का काम बंद हो गया।
आसपास रहने वाले लोगों को अचानक ही किसी की चीख सुनाई देती थी तो कभी कोई आवाज देकर राहगीरों से मदद की अपील करने लगता था जिस कारण साल 1996 में अंग्रेजों के जमाने की इन खदानों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।
सालों पहले ही यहां के निवासियों ने इस जगह को ख़ाली कर दिया था। अब यहां कई विशाल पेड़ उग आए हैं जिसने इस जगह को जंगल का रूप दे दिया है। यहां के सन्नाटे में भी खौफ़ महसूस किया जा सकता है।
1996 से बनी है प्रेत-आत्माओं का घर:
कई अजीब गतिविधियों के चलते इसको साल 1996 में बंद कर दिया गया था, लेकिन इसके बंद होने के बावजूद भी यहां पर होने वाली असामान्य चीज़ों पर फ़ुल स्टॉप नहीं लगा।
सालों से बंद पड़ी यह खदान भूत-प्रेतों का अड्डा बन चुकी है। जहां रात में शुरू होता है अजीबोगरीब हादसों और भयानक आवाजों का सिलसिला। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां उन मजदूरों की आत्माएं भटकती है, जिन्होंने तड़प-तड़पकर अपनी जान दी थी। वीरान पड़ी यह जगह अब जंगल में तब्दील हो चुकी है।
लोगों के मुताबिक, इस खदान के सामने से जो भी गुजरता है या तो खुद ही उसकी मौत हो जाती है या फिर उसका एक्सीडेंट हो जाता है। यहां से गुजरने वाले वाहनों के हादसे तो आम बात हो गयी है। बुजुर्गों की मानें तो किसी समय पर यहां पर चुड़ैल का साया था जिसकी वजह से ही अक्सर एक्सीडेंट्स होते थे। एक हेलीकॉप्टर भी इस जगह पर क्रैश हो चुका है। किसी को पता नहीं चला कि आखिर उस क्रैश की वजह क्या थी। जिस वजह से लोग इसके आसपास तक नहीं भटकना चाहते।
इस जगह पर कई हॉरर फिल्मों और सीरियल्स की शूटिंग भी हो चुकी है।
लंबी देहर माइन्स कैसे पहुंचे?
लंबी देहर माइंस उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के देहरादून जिले में स्थित है।यह जिला मुख्यालय देहरादून से लगभग 32 किमी. तथा माल रोड मसूरी से 10 किमी की दुरी पर स्थित है।
सड़क मार्ग द्वारा:
लंबी देहर माइंस माल रोड से 10 किमी की दूरी पर मसूरी के बाहरी इलाके में स्थित हैं, कोई भी आसानी से लाइब्रेरी रोड के माध्यम से निजी कैब या टैक्सी सेवा प्राप्त कर सकता है।
रेल द्वारा:
लंबी देहर माइंस का निकटतम रेलवे स्टेशन 32 किमी दूर देहरादून में है।देहरादून भारत के प्रमुख स्थलों के साथ रेलवे नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। देहरादून से स्वाला गांव के लिए टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
वायु द्वारा:
लंबी देहर माइन्स का सबसे अच्छा समय:
लंबी देहर माइंस जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से जून के बीच है। इन महीनों में यहां की यात्रा करना सबसे अच्छा और सुखद होता है।
सर्दी के मौसम में यहां का मौसम ठंडा होता है। सर्दियों के मौसम में आसपास की पहाड़ियों पर बर्फबारी के कारण यहां का तापमान बहुत नीचे चला जाता है। शीत ऋतु के ठंडे मौसम के कारण यहाँ ऊनी वस्त्रों की आवश्यकता पड़ती है।
बारिश के मौसम में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की धमकी देने वाली भारी बारिश के कारण यहां की यात्रा करना थोड़ा मुश्किल होता है। यहाँ का तापमान सर्दियों के मौसम में 3°C से 10°C के बीच और गर्मी के मौसम में 15°C से 25°C के बीच रहता है।










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